मौत की राजनीति, आख़िर ऊंट किस करवट बैठेगा?

14 फ़रवरी को भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में मारे गए सीआरपीएफ़ के जवानों को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने राजनीतिक शिकार क़रार दिया था। इस बीच भारत ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान नियंत्रित कश्मीर में मौजूद आतंकियों के ठिकानों पर बम बरसाए हैं।

भारत में आम चुनाव सिर पर हैं और दूसरी ओर पाकिस्तान और भारत के बीच लगातार युद्ध जैसी स्थिति पैदा होती जा रही है। लेकिन इन सब के बीच दोनों देशों में एक बात जो सबसे आगे होनी चाहिए थी वह बहुत पीछे होती जा रही है और वह है विकास की बात। 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के नारे के साथ सत्ता में आए थे तो वर्ष 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान भी विकास के नाम पर ही जीत कर इस देश की सत्ता पर बैठने में कामयाब हुए थे।

अब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यकाल अपनी समाप्ति पर पहुंच रहा है अगर उनके विकास के नारे पर एक नज़र डाली जाए तो शायद ही हमें ढूंढने से कुछ मिल पाए, नहीं तो उन्होंने अधिकतर अपना समय पहले की मनमोहन सरकार द्वारा अधूरे छोड़े गए कामों को ही पूरा करने में लगा दिया। जबकि अगर दूसरी अन्य चीज़ों का देखा जाए तो उनमें मोदी के कार्यकाल में काफ़ी वृद्धि देखने को मिली है, जैसे गाय के नाम पर हत्याएं, कश्मीर में मारे जाने वाले भारतीय सैनिक या अलगाववादी संगठनों के सदस्य और इसी तरह किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याएं।

दूसरी ओर पाकिस्तान में इमरान ख़ान के सत्ता में आने के बाद जहां उन्होंने आरंभ में बहुत ही तेज़ी से सुधार के काम शुरू किए थे, लेकिन एक बार फिर पाकिस्तान में टार्गेट किलिंग से लेकर भारत-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव में वृद्धि देखने को मिल रही है। इमरान ख़ान के मामले में अभी कुछ अधिक कहना जल्दबाज़ी होगा क्योंकि उन्हें अभी सत्ता में आए ज़्यादा समय नहीं हुआ है, इसलिए हम अपने इस लेख में अधिक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल और उनकी रणनीतियों के बारे में बात करेंगे।

भारत में सक्रिय कुछ समाजिक कार्यकर्ताओं की अगर मानें तो वे कहते हैं कि मोदी के राजनीति सफ़र पर अगर आप नज़र डालें तो उनकी राजनीति में विकास से अधिक सांप्रदायिक कार्य ज़्यादा हुए हैं और चाहे गुजरात हो या अब पूरा भारत उनके कार्यकाल में धर्म के नाम पर सबसे अधिक मौतें हुई हैं। समाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ मोदी को सत्ता में बना रहना आता है लेकिन उनका रास्ता बहुत ही ख़तरनाक है, जहां वे अपने विरोधियों की आवाज़ दबाना जानते हैं वहीं मौत के खेल से भी उन्हें डर नहीं लगता है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने 14 फ़रवरी को आतंकी हमले में मारे जाने वाले सीआरपीएफ़ के जवानों की मौत की सच्चाई जानने के लिए भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से पूछताछ किए जाने की बात करके कहीं न कहीं एक बार फिर उन्होंने मोदी की उसी राजनीति की ओर इशारा करने का प्रयास किया है जिसकी ओर समाजिक कार्यकर्ता इशारा कर रहे हैं।

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