पाकिस्तान में परमाणु हथियारों की शीर्ष समिति की आपात बैठक, पाकिस्तान के हमले के बाद जवाबी कार्यवाही के लिए मोदी सरकार पर भारी दबाव, चुनावी लाभ के लिए क्या देश को युद्ध में झोंक दिया जाएगा?

पाकिस्तानी सेना द्वारा दो भारतीय युद्धक विमानों को मार गिराने और दो पायलटों को ज़िंदा पकड़ने के दावे के बाद अब भारतीय सेना का क्या जवाब होगा? इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

भारतीय सुरक्षा बलों पर पुलवामा में आत्मघाती हमले के बाद चुनावी मौसम के कारण मोदी सरकार पर पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोई बड़ी सैन्य कार्यवाही का दबाव था।

हालांकि पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान ख़ान ने एक बयान जारी करके नई दिल्ली सरकार से पुलवामा हमले में शामिल होने के पाकिस्तान स्थित आतंकवादी गुटों के ख़िलाफ़ सुबूत देने और कार्यवाही के लिए कहा था, लेकिन मोदी सरकार ने इन आतंकवादी गुटों को सज़ा देने का ख़ुद फ़ैसला किया।

पाकिस्तानी सीमा में भारतीय सेना के हवाई हमले के बाद यह समझा जा रहा था कि पाकिस्तान इस हमले का जवाब देने की पोज़िशन में नहीं है, लेकिन अगले ही दिन यानी बुधवार को पाकिस्तान ने भारत प्रशासित कश्मीर में हवाई हमला किया और जब भारतीय युद्धक विमानों ने जवाबी कार्यवाही की तो पाकिस्तानी सेना ने भारत के दो युद्धक विमान मार गिराए।

हालांकि भारत ने अपने एक विमान और एक पायलट के लापता होने की ख़बर की पुष्टि की है।

पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान ख़ान ने भारत के अगले क़दम की संभावना के मद्देनज़र बुधवार को परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का निर्णय लेने वाली शीर्ष समिति की आपात बैठक बुलाई है।

परमाणु हथियारों से लैस दो पड़ोसी देश 1947 के बाद से अब तक तीन युद्ध लड़ चुके हैं और इनमें मुख्य मुद्दा कश्मीर रहा है।

दोनों ही देश पूरे कश्मीर पर अपना हक़ जताते रहे हैं।

मंगलवार को तड़के भारत द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में किया गया हवाई हमला 1971 में तीसरे युद्ध के बाद पाकिस्तानी सीमा में 50 किलोमीटर के भीतर घुसकर किया गया पहला हमला था। हालांकि उसमें होने वाले नुक़सान के बारे में दोनें ओर से विरोधाभासी दावे किए जा रहे हैं।

पाकिस्तान में पकड़े गए भारतीय पायलट की वीडियो फ़ुटेज लगातार सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिससे भारत सरकार पर अपने पायलट को आज़ाद कराने और उचित जवाबी कार्यवाही के लिए दबाव बढ़ता जा रहा है।

इसे लेकर इमरान ख़ान ने आशंका जताई है कि कहीं इस तरह की जवाबी कार्यवाहियां एक बड़े युद्ध में न बदल जायें, जिस पर दोनों देशों में से किसी का निंयत्रण नही रहे।

चुनावों में अपनी कमज़ोर स्थिति को पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कार्यवाही करके मज़बूत बनाने और जनमत का रुख़ बीजेपी की और मोड़ने की भारतीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम की सारी तरकीबें उटली पड़ती नज़र आ रही हैं।

अब मोदी सरकार पर पहले से अधिक बड़ा हमला करने और पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए भारी दबाव है। लेकिन यहां यह सवाल है कि क्या मोदी चुनावी फ़ायदे के लिए देश को एक भयानक युद्ध में झोंक दें?

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