राफ़ेल घोटाले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई

प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार राफ़ेल विमान सौदे में हुए घोटाले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज करने के अपने 14 दिसम्बर के फ़ैसले की समीक्षा वाली दो अर्ज़ियों पर सुप्रीम कोर्ट के चैम्बर में सुनवाई की गयी।

इन अर्ज़ियों को पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी तथा अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दायर की हैं। सुप्रीम कोर्ट के अटार्नी जनरल ने कहा कि राफ़ेल लड़ाकू विमानों के दो स्क्वाड्रन उड़ान भरने लायक स्थिति में आ रहे हैं जबकि पहला स्क्वाड्रन इस साल सितम्बर में आएगा।

अदालत ने टिप्पणी की कि राफ़ेल लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है। यद्यपि 1960 के दशक वाले मिग-21 ने एफ़-16 के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया है। अटार्नी जनरल ने कहा कि हाल में हमारे देश पर बम बरसाने वाले एफ़-16 लड़ाकू विमानों से अपने देश की रक्षा के लिये हमें राफ़ेल लड़ाकू विमान चाहिये। राफ़ेल के बिना हम उनका कैसे प्रतिरोध कर सकते हैं।

अटॉर्नी जनरल ने न्यायालय में कहा कि राफ़ेल सौदे से जुड़े दस्तावेजों को सार्वजनिक करने वाला, सरकारी गोपनीयता क़ानून के तहत और अदालत की अवमानना का दोषी है।

अटॉर्नी जनरल ने राफ़ेल पर पुनर्विचार याचिका और ग़लत बयान संबधी आवेदन खारिज करने का अनुरोध करते हुए कहा कि ये चोरी किए गए दस्तावेज़ों पर आधारित है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि याचिकाकर्ता ने राफ़ेल सौदे पर जिन दस्तावेजों पर भरोसा किया है वे गोपनीय हैं और आधिकारिक गोपनीयता कानून का उल्लंघन हैं।

ज्ञात रहे कि शीर्ष अदालत ने 14 दिसंबर 2018 को वे सारी याचिकाएं खारिज कर दीं थीं जिनमें न्यायालय की निगरानी में 58,000 करोड़ रुपये के लड़ाकू विमान सौदे की सीबीआई से जांच कराने का अनुरोध किया गया था।

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