अमरीका का घिनौना अपराध मानवता के विरुद्ध अपराध की सभी हदों के पार

इससे पहले ईरानी राष्ट्रपति डॉक्टर हसन रूहानी ने कहा था कि अमरीकी सरकार का यह दावा झूठा है कि वह सिर्फ़ ईरानी सरकार व व्यवस्था के ख़िलाफ़ है, यह एक लज्जाजनक झूठा दावा है। वे यहां तक कि ईरानी जनता के लिए दवाओं के एक केन्द्र के निर्माण को भी रुकवाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति के शब्दों में जो काम अमरीकी सरकार ईरानी जनता के ख़िलाफ़ कर रही है वह मानवता के विरुद्ध अपराध से भी अधिक घिनौना चीज़ है।

परमाणु समझौते जेसीपीओए के संबंध में अमरीका की नीति सिर्फ़ इस समझौते से निकलने तक सीमित नहीं है। अमरीका ने जो रवैया ईरान के ख़िलाफ़ अपना रखा है उससे आम जनता का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की बहुआयामी पाबंदियां और उनका आम लोगों के जीवन पर कुप्रभाव ईरानी राष्ट्र से अमरीका की दुश्मनी को दर्शाती है।

अमरीकी पाबंदियों की वजह से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के सीमित होने की वजह से ईरान के लिए चिकित्सा व उपचार सेवा तक पहुंच और दवाओं व चिकित्सा उपकरणों की ख़रीदारी तक प्रभावित हुयी है। अंतर्राष्ट्रीय नियम व मानवाधिकार के अनुसार, देशों पर अनिवार्य है कि वे चिकित्सा सेवा तक पहुंच के अधिकार का सम्मान करें ताकि लोगों की उपचार व स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच प्रभावित न हो।

इन सबके बावजूद अमरीकी सरकार का दावा है कि ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियों से उपचार व दवा क्षेत्र प्रभावित नहीं होगा। यह ऐसी हालत में है कि रोयटर्ज़ ने अभी हाल में एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया कि अमरीकी दावों के विपरीत ईरान के ख़िलाफ़ अमरीकी पाबंदियों की वजह से खाद्य और दवा कंपनियां ईरानी पक्षों के साथ समझौते रद्द कर रही हैं।

जो बात स्पष्ट है वह यह कि अमरीकी पाबंदियां सीधे तौर पर ईरानी जनता को निशाना बना रही हैं और इस संबंध में अमरीका जनमत को गुमराह करने के लिए दूसरी बातें कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के दृष्टिकोण से भी यह बात स्पष्ट हो जाती है कि अमरीका ईरान के संबंध में अपनी नीति में आम जनता को तनिक भी अहमियत नहीं देता।

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