चुनाव का एलान होते ही कूड़े के ढेर में “आधार कार्ड”!!!

भारत में आम चुनाव की तारीख़ का एलान होते ही जहां राजनीतिक पार्टियों में गहमागहमी आरंभ हो गई है वहीं फ़र्ज़ी वोटरों के लिए भी कोशिशें तेज़ हो चुकी हैं। वैसे यह पहली बार नहीं हुआ है कि भारत में सैकड़ों की संख्या में आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड मिले हों और अब तो यह आम बात बनती जा रही है। वैसे क्यों न बने, क्योंकि इसके मिलने के बाद पुलिस आती है खाना-पूरी करती है और फिर मामला शांत हो जाता है। शायद आपके मन में प्रश्न उठे कि कोई पार्टी इसपर आवाज़ क्यों नहीं उठाती? तो ऐसा नहीं है कि, सवाल नहीं उठाती पर वैसे नहीं जैसे उठाना चाहिए था इसका भी कारण है और वह यह कि “चोर-चोर मौसेरे भाई” यह तो सुना ही होगा।

इस बीच ठाणे पुलिस का कहना है कि कूड़े के ढेर में मिले आधार कार्ड 2015 से पहले के बने हुए हैं और इन पर 2013 से 2015 की डाक टिकटें लगी हैं, इनका अब पाया जाना सवाल खड़े करता है। वैसे पुलिस ने कहा है कि हमने इस संबंध में जांच आरंभ कर दी है और जांच के परिणाम आते ही मीडिया को भी इस बारे में विस्तार से बताएंगे। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि कूड़े के ढेर से मिले सभी आधार कार्डों पर स्थानीय डाकघर के डाक टिकट लगे हुए हैं और स्टाम्प लगे दस्तावेज़ डाक विभाग की संपत्ति होती है तो हमने इन्हें डाकघर भेज दिया है। उन्होंने कहा, यह काम किसी पोस्टमैन का भी हो सकता है, जो इन आधार कार्ड को घर-घर जाकर डिलीवर नहीं करना चाहता होगा।

वैसे इन तमाम बातों को सुनकर आप किसी परिणाम तक नहीं पहुंच पाएंगे क्योंकि यह पहली बार नहीं है कि भारत के किसी शहर, गांव यह किसी इलाक़े में भारत सरकार के दावे के अनुसार सबसे सुरक्षित और अहम आधार कार्ड आपको कूड़े के ढेर में मिल जाएं। कुछ भारतीय जानकारों का मानना है कि अगर एक बार इस तरह के मामलों की कड़ाई से जांच हो जाए और इस तरह के काम करने वालों के ख़िलाफ़ राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज करके पूरे देश की जनता के सामने उन्हें सज़ा दी जाए तो इसपर आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। जानकारों के मुताबिक़ देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में आए दिन हो रही शिकायतों के कारण जनता के मन में अब चुनाव में उनके द्वारा किए जा रहे मताधिकार को लेकर संदेह पैदा होने लगा है और यही कारण है कि भारत में होने वाले चुनवों में मताधिकार के प्रयोग करने वालों का प्रतिशत दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है।

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