भारत में आम चुनाव और आम जनता के सवालों को दबाने की साज़िश!

वैसे तो पत्रकारिता या मीडिया कि जिसका धर्म सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछना होना चाहिए, उसने इधर कुछ वर्षों में सत्ताधारी लोगों के सामने घुटने टेक दिए हैं। अब ऐसा भी नहीं कहा जा सकता कि मीडिया के सभी लोग घुटने टेकने वालों में शामिल हैं लेकिन भारतीय न्यूज़ चैनलों और समाचारपत्रों को देखकर यह ज़रूर कहा जा सकता है कि इस क्षेत्र के अधिकतर लोग सत्ताधारी लोगों के सामने नतमस्तक हो चुके हैं। इन सबके बावजूद भारत की आम जनता ने अभी अपना ज़मीर नहीं बेचा है इसलिए यह ज़रूर है कि भले ही उनकी आवाज़ सत्ता में बैठे लोगों को सुनाई नहीं दे रही हो, लेकिन जब समय आएगा तो वह अपने फ़ैसले से सबको आश्चर्यचकित कर देंगे।

अब बात करते हैं उन मुद्दों की कि जिनकी आड़ में भारत की आम जनता के सवालों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। वर्ष 2014 में भारत में हुए आम चुनाव में इस देश की वर्तामान सत्ताधारी पार्टी बीजेपी का नारा था “अच्छे दिन आने वाले हैं” लेकिन पांच वर्ष की मोदी सरकार में अब जब इस देश की आम जनता से पूछा जा रहा है कि क्या आपके अच्छे दिन आए, तो अधिकतर लोगों ने इसके जवाब में कहा कि अच्छे दिन तो नहीं आए पर और अधित बुरे दिन ज़रूर हो गए हैं। इस जवाब के बाद दुनिया के किसी भी बुद्धिमान व्यक्ति से अगर आप पूछेंगे तो वह यही कहेगा कि अच्छे दिन का नारा देने वाली पार्टी का रिज़्लट, फेल है।

अब एक बार फिर चुनाव की घोषणा हो चुकी है और एक नए नारे के साथ वही अच्छे दिन वाली पार्टी बीजेपी मैदान में है कि “मोदी है तो मुमकिन है” अब लोग पूछ रहे हैं कि क्या पांच साल पहले मोदी नहीं थे जो उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए क्या अच्छे दिन आ गए?, क्या 100 स्मार्ट सिटी बन गए?, क्या 15 लाख लोगों के खातों में आ गए? और क्या देश के युवाओं को प्रतिवर्ष दो करोड़ रोज़गार प्राप्त हो गया?, यह सब मोदी के सत्ता में रहते हुए मुमकिन नहीं हो पाया है तो अब कैसे मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद मुमकिन होगा?

इसबीच यह ज़रूर है कि इन सभी सवालों को राष्ट्रवाद की आड़ में अब दबाने का प्रयास शुरू हो गया है ताकि भारत की जनता इन सवालों को न पूछकर राष्ट्रवाद की लहरों में बह जाए और मोदी के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के सपने को मुमकिन बना दे। भारत माता का निरंतर आह्वान, देश के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए झंडे, सेना के पराक्रम का बखान, सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के लिए खड़ा होना और अब एयर इंडिया में जय हिंद कहने का आदेश- इस बात का सबूत है कि इस भारत की वर्तमान मोदी सरकार ने अपने एजेंडे को पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ाया है ताकि इस देश की जनता अपने उन सभी बुनियादी प्रश्नों को भूल जाए जिसके आधार पर इन्होंने वर्ष 2014 में दिल्ली की सत्ता प्राप्त की थी।

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