क्या गोलान हाइट्स के मोर्चे पर युद्ध लड़ने जा रहे हैं सीरिया और इस्राईल, क्या होगा नतीजा?

इस्राईली प्रधानमंत्री अपनी इस कोशिश में नाकाम हो गए तो अब उन्होंने नए पैंतरे के तहत अमरीकी सिनेटर लिंडसे ग्राहम का सहारा लिया है जो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के क़रीबी व्यक्ति माने जाते हैं। नेतनयाहू ग्राहम से एसे बयान दिलवाना चाहते हैं जिसमें अमरीका 1200 वर्ग किलोमीटर के गोलान हाइट्स के इलाक़े सीरिया का इलाक़ा मानने के बजाए इस्राईल का भाग मान ले।

लिंडसे ग्राहम नेतनयाहू तथा इस्राईल में अमरीका के राजदूत डेविड फ़्रेडमैन के साथ गोलान हाइट्स का दौरा कर चुके हैं और दोनों के सामने वह वादा कर चुके हैं कि जब वाशिंग्टन लौटेंगे तो राष्ट्रपति ट्रम्प को तैयार करेंगे कि अमरीका गोलान हाइट्स के इलाक़े को इस्राईल का हिस्सा मान ले। वह ज़ायोनी सिनेटर टेड क्रूज़ के साथ मिलकर कांग्रेस में इस विषय से संबंधित प्रस्ताव पारित करवाने पर काम कर रहे हैं।

नेतनयाहू अमरीका में यहूदियों की आइपेक कान्फ़्रेन्स में भाग लेने के लिए वाशिंग्टन जाने वाले हैं। ताक़तवार ज़ायोनी लाबी की ओर से यह कान्फ़्रेन्स 26 मार्च को होगी। नेतनयाहू वाशिंग्टन में ट्रम्प से भी मुलाक़ात करेंगे। नेतनयाहू के प्रतिद्वंद्वी बेनी गैन्ट्स भी कह चुके हैं कि वाइट हाउस से एक बयान जारी होने वाला है जिसमें गोलान हाइट्स को इस्राईल का भाग स्वीकार किया जाएगा। अमरीका की ओर से यह बयान अब जारी हो चुका है।

सीरिया के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करके अमरीकी बयान की निंदा की है और कहा है कि इस प्रकार के बयान से अमरीका की नीतियों को कुरूप चेहरा सामने आता है। मगर इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण संदेश सीरिया के विदेश उपमंत्री फ़ैसल मेक़दाद ने दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अपात फ़ोर्स के कमांडर क्रिस्टियन लोंड के माध्यम से संदेश भिजवाया कि यदि इस्राईली सैनिक गोलान हाइट्स से बाहर नहीं निकलते हैं तो हम उन पर हमला करने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे।

उधर तेल अबीब में आस्ट्रेलिया के पूर्व राजदूत मार्टिन इंडिक ने ट्वीट किया कि गोलान हाइट्स सीरिया का हिस्सा है जो भी इस इलाक़े को इस्राईल में मिलाने की बात कर रहा है वह आग से खेलने की कोशिश कर रहा है। इस्राईल के पांच प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि वह गोलान हाइट्स से अपने सैनिकों को इस शर्त पर बाहर निकाल लेंगे कि इस्राईल के साथ सीरिया शांति समझौता कर ले लेकिन अब सीरिया इस प्रकार के किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है।

जो बात नेतनयाहू और उनके प्रतिद्वंद्वी इस्राईली राजनेता नहीं समझ पा रहे हैं वह यह है कि आठ साल तक जारी रहने वाले भयानक संकट से सीरिया विजय के साथ बाहर आ चुका है। इस समय उसकी ताक़त काफ़ी बढ़ चुकी है और सीरियाई सेना के पास युद्ध के नए अनुभव आ चुके हैं। दूसरी बात यह है कि सीरिया का संबंध पश्चिमी एशिया में बन चुके मज़बूत इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे से है जिसका नेतृत्व ईरान के हाथ में है और यह मोर्चा अब तक किसी भी युद्ध में अगर उतर है तो विजयी होकर ही बाहर निकला है। वर्ष 1973 से इस्राईल इस मोर्चे के हाथों बार बार पराजित होता रहा है।

सीरियाई सेना ने ईरान, रूस और हिज़्बुल्लाह जैसे अपने घटकों के साथ मिलकर पूरे दक्षिणी इलाक़े को चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद करवा लिया वह सारे संगठन ध्वस्त हो गए जिन्हें इस्राईल से मदद मिल रही थी। जार्डन से मिलने वाली सीरियाई सीमा पर बना अन्नसीब पास पुनः खुल चुका है। यह सब कुछ हुआ और नेतनयाहू एक गोली चलाने की हिम्मत भी नहीं कर पाए हालांकि वह धमकियां बहुत देते थे।

कुछ ही दिन पहले सीरिया ने गोलान हाइट्स के क़रीब के इलाक़ों में अपनी सैनिक इन्फ़ोर्समेंट बढ़ दी है और सेना तथा रक्षा युनिटों को एलर्ट कर दिया है। यह किसी भी इस्राईली हमले का मुंह तोड़ जवाब देने की तैयारी है।

गोलान हाइट्स के इलाक़े में इस्राईल और सीरिया के बीच लड़ाई किसी भी समय शुरू हो सकती है और यह तय है कि यह इलाक़ा सीरिया के नियंत्रण में वापस आ जाएगा जिस तरह सीरिया के शेष इलाक़े चरमपंथियों के क़ब्ज़े से आज़ाद होकर सीरियाई सरकार के नियंत्रण में आ गए।

ट्रम्प और अमरीकी कांग्रेस गोलान हाइट्स को इस्राईल का हिस्सा मानते रहें, इससे कुछ भी बदलने वाला नहीं है। इस मामले में भी अमरीका को मुंह की खानी पड़ेगी जिस तरह सीरिया को विभाजित करने की साज़िश में उसे मुंह की खानी पड़ चुकी है।

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