राजनीतिक फायदे के लिए सशस्त्र सेनाओं के इस्तेमाल का विरोध किया पूर्व सैनिकों ने

भाषा के अनुसार राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में पूर्व सैनिकों ने लिखा है कि महोदय, हम नेताओं की असामान्य और पूरी तरह से अस्वीकृत उस प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं जिसमें वे सीमापार हमलों जैसे सैन्य अभियानों का श्रेय ले रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि हद तो यह हो गई कि देश की सशस्त्र सेनाओं को “मोदी जी की सेना” बताने के दावे तक किये जा रहे हैं।
पूर्व सैनिकों ने लिखा है कि सेवारत तथा सेवानिवृत्त सैनिकों के बीच यह बहुत ही असंतोष का मामला है कि सशस्त्र सेनाओं का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा चलाने के लिए किया जा रहा है। पत्र में पूर्व सैनिकों ने चुनाव प्रचार अभियानों में भारतीय वायु सेना के पायलट अभिनंदन वर्धमान और अन्य सैनिकों की तस्वीरों के इस्तेमाल पर भी नाखुशी जताई गई है।

राष्ट्रपति कोविंद को भेजे गए पत्र पर जिन लोगों के हस्ताक्षर हैं उनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) एसएफ रोड्रिग्ज, जनरल (सेवानिवृत्त) शंकर रॉयचौधरी और जनरल (सेवानिवृत्त) दीपक कपूर, भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (सेवानिवृत्त) एनसी सूरी आदि शामिल हैं। तीन पूर्व नौसेना प्रमुखों एडमिरल (सेवानिवृत्त) एल रामदास, एडमिरल (सेवानिवृत्त) अरुण प्रकाश, एडमिरल (सेवानिवृत्त) मेहता और एडमिरल (सेवानिवृत्त) विष्णु भागवत ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। यह पत्र राष्ट्रपति को बृहस्पतिवार को पास भेजा गया था।
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक चुनावी रैली में सशस्त्र सेनाओं को “मोदीजी की सेना” बताया था जिसपर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। भारत के निर्वाचन आयोग ने भी इन टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *