ज़हरीले चुनाव प्रचार पर लगाम लगाने की शक्ति नहीं है चुनाव आयोग के पास? सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार

चुनाव आयोग की शक्तियों पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होगी।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा धर्म के आधार पर ध्रुवीकरण करने और मुसलमानों से बीएसपी को वोट देने की बीएसपी प्रमुख की अपील पर नोटिस लेते हुए मुख्य न्यायाधीश ने चुनाव आयोग से पूछा था कि ऐसी स्थिति में आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर क्या कार्रवाई की जाती है?

इस पर आयोग ने बताया, ‘इस मामले में चुनाव आयोग की शक्तियां बहुत सीमित हैं। हम सिर्फ़ नोटिस जारी करके जवाब मांग सकते हैं। हमें किसी पार्टी के पहचान को रद्द करने या उम्मीदवार को अयोग्य ठहराने का अधिकार नहीं है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद, चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती को चुनावी अभियान चलाने पर सीमित समय के लिए पाबंदी लगा दी है।

योगी पर तीन दिनों के लिए और मायावती पर दो दिनों के लिए पाबंदी लगाई गई है, जो 16 अप्रैल को सुबह छह बजे से लागू हो जाएगी।

चुनाव आयोग की ओर से पेश हुए वकील संजय हेगड़े से जब मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि क्या चुनाव आयोग सांप्रदायिक बयानबाज़ी के आधार पर वोट मांगने वालों के खिलाफ़ सिर्फ़ इतनी ही कार्यवाही कर सकता है?

इस पर हेगड़े ने कहा कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को कई सारी शक्तियां दी गई हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने आयोग के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को निर्देश दिया कि शक्तियों पर विचार के दौरान कोर्ट में मौजूद रहें।

ग़ौरतलब है कि हरप्रीत मनसुखानी नाम की एक एनआरआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में एक कमेटी बनाई जाए, जो पूरी चुनावी प्रक्रिया पर नज़र रखे और चुनाव आयोग की भूमिका की भी जांच करे।

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