डील ऑफ़ द सेंचरी या शताब्दी की सबसे बड़ी साज़िश?

अमरीका शीघ्र ही फ़िलिस्तीनियों और इस्राईल के बीच के शताब्दियों पुराने झगड़े के समाधान के लिए तैयार की गई डील ऑफ़ द सेंचरी या साज़िश ऑफ़ द सेंचरी से संबंधित अहम जानकारी सार्वजनिक करने वाला है, लेकिन इस तथाकथित डील से संबंधित अब तक जो भी जानकारी लीक हुई है, उसे स्वीकार करने से फ़िलिस्तीनियों ने एक ज़बान होकर इनकार कर दिया है।

इसलिए कि इस डील के तहत, फ़िलिस्तीनियों को एक पूर्ण स्वाधीन देश के गठन का अधिकार नहीं होगा, बैतुल मुक़द्दस से उन्हें अपना दावा ख़त्म करना होगा और दुनिया भर में शताब्दियों से शरणार्थियों का जीवन गुज़ार रहे फ़िलिस्तीनियों को अपने वतन वापस लौटने का कोई अधिकार नहीं होगा।

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस तथाकथित डील को शुरू में ही फ़िलिस्तीनी नेताओं ने इसलिए ख़ारिज कर दिया है, क्योंकि इसमें उनकी सबसे बड़ी मांग स्वाधीन फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के गठन की उपेक्षा की गई है। यही कारण है कि फ़िलिस्तीनी नेता अब इस्राईली प्रधान मंत्री के महत्वपूर्ण दोस्त समझे जाने वाले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प को मध्यस्थता के योग्य ही नहीं समझते।

इसके अलावा वाशिंगटन पोस्ट ने एक और बड़ा ख़ुलासा किया है कि इस डील को तैयार करने वाले ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेर्ड कुश्नर को रियाज़ में आयोजित एक बैठक में उस समय एक बड़ा झटका लगा, जब सऊदी किंग सलमान ने फ़िलिस्तीनियों के अधिकारों पर बल दिया और इस तथाकथित डील की आलोचना की।

ग़ौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन इस डील को लागू करने के लिए मध्यपूर्व के देशों ख़ासकर सऊदी अरब के समर्थन को बहुत महत्वपूर्ण समझ रहा था, और सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने इसे लागू करने के लिए रियाज़ के भरपूर समर्थन का भी आश्वासन दिया था।

हालांकि वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया है कि कुश्नर जो अपने दोस्त सऊदी युवराज की ओर से काफ़ी आश्वस्त थे, किंग सलमान की आलोचना ने भौंचक्के रह गए।

फ़िरवरी में रियाज़ की अपनी यात्रा के दौरान कुश्नर ने जब इस मुद्दे पर सऊदी किंग और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के तेवर देखे तो उन्हें रक्षात्मक रुख़ अपनाना पड़ा।

इस डील की जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके दामाद कुश्नर ने इस डील में केवल इस्राईल की सुरक्षा के मुद्दे को ही केन्द्र में रखा है।

इसके बदले में फ़िलिस्तीनियों को जो प्रस्ताव दिया गया है, मुख्य रूप से वह आर्थिक संभावनाओं पर निर्भर है। जबकि फ़िलिस्तीनियों को वेस्ट बैंक समेत समस्त इस्राईली क़ब्ज़े वाले इलाक़ों से हमेशा के लिए हाथ धोना पड़ेगा।

हालांकि अब सऊदी अरब समेत अन्य अरब देशों और यूरोप द्वारा कुश्नर की इस तथाकथित डील पर भोरसा नहीं दिखाने के कारण, सिरे से ही इसकी सफलता पर प्रश्नचिंह लग गया है।

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