मोदी का एक और झूठ, चुनावी हलफ़नामे में फिर दी ग़लत जानकारी!

प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत के वरिष्ठ पूर्व पत्रकार साकेत गोखले याचिका में आरोप लगाया है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1998 से गुजरात सरकार की एक विवादित भूमि आवंटन नीति के लाभार्थी थे, जिसके तहत सार्वजनिक ज़मीनों को विधायकों को कम क़ीमत पर आवंटित किया गया था। याचिका के अनुसार, मोदी को 2002 में इस नीति का लाभ मिला और 25 अक्टूबर, 2002 को गांधीनगर सिटी (प्लॉट नं. 411, सेक्टर1, गांधीनगर) में सिर्फ 1.3 लाख रुपये में एक प्लॉट उन्हें दिया गया था। जब मोदी ने 2007 में गुजरात विधानसभा का चुनाव लड़ा था तो उन्होंने अपने हलफ़नामे में प्लॉट नं. 411 की जानकारी दी थी।

इस बीच वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दायर किए गए हलफ़नामे में और 2015, 2016 तथा 2017 में प्रधानमंत्री द्वारा अपने संपत्ति की घोषणा में इस प्लाट की जानकारी कथित तौर पर नहीं दी गई है। विधायकों को सस्ते क़ीमत में ज़मीन आवंटित करने की यह नीति उस समय विवादों में आ गई जब गुजरात हाईकोर्ट ने साल 2000 में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। दो नवंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह जल्द इस मामले की सुनवाई करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि इस नीति के तहत और कोई भी आवंटन नहीं होना चाहिए और बिना हाईकोर्ट की सहमति के पहले से आवंटित किए गए प्लॉट के ट्रांसफर की इजाज़त नहीं दी जाएगी। ऐसा आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीके जैन और जस्टिस मदन लोकुर की पीठ ने गुजरात सरकार की ओर से पेश हुईं वकील मीनाक्षी लेखी की दलीलों को सुना था, लेखी ने उस समय कहा था कि इस नीति के तहत साल 2000 के बाद से कोई भी आवंटन नहीं हुआ है और इस नीति पर पुनर्विचार किया जा रहा है।

दूसरी ओर याचिकाकर्ता गोखले का कहना है कि यह बयान बिल्कुल ग़लत है क्योंकि मोदी को इसी नीति के तहत साल 2002 में ज़मीन दी गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नरेंद्र मोदी ने हलफ़नामे में प्लॉट नं. 411 की जगह गांधीनगर में प्लॉट नंबर 401/ए के एक चौथाई हिस्से का मालिक बताया है, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। गोखले ने कहा कि प्लॉट नंबर 401/ए जैसी कोई जगह है ही नहीं। याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि गुजरात सरकार की नीति के तहत प्लॉट नंबर 401 को वित्त मंत्री अरुण जेटली को आवंटित किया गया है। गोखले ने स्वयं के द्वारा किए गए दौरे के आधार पर दावा किया कि प्लॉट नंबर 401 अन्य भाजपा नेताओं को आवंटित किए गए प्लॉट के बग़ल ही है और यह सभी प्लॉट गांधीनगर के बेहद ख़ास स्थान पर हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी दस्तावेज़ों से इस बात की पुष्टि होती है कि प्ल़ॉट नंबर 411 के मालिक अभी भी नरेंद्र मोदी ही हैं।

वरिष्ट पत्रकार साकेत गोखले ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों का हवाला दिया है जिसमें उम्मीदवारों को ज़रूरी जानकारी का ख़ुलासा करने को कहा गया है, अगर कोई उम्मीदवार ज़मीन, संपत्ति की जानकारी का ख़ुलासा नहीं करता है तो जनप्रतिनिधित्व क़ानून की धारा 1951 के तहत आपराधिक मामला होगा।

उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार की यह विवादित नीति की सुप्रीम कोर्ट में आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि कई जजों ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था, इसकी वजह से यह मामला 28 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया गया।

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