ईरान के साथ युद्ध के लिए रणक्षेत्र सजाने वाले बोल्टन क्या ख़ुद ही इस युद्ध की सबसे पहली क़ुर्बानी होंगे?

बोल्टन ने ट्रम्प प्रशासन पर वेनेज़ुएला में अमरीका के हस्तक्षेप के लिए दबाव बनाया, ईरान से टकराव के लिए मध्यपूर्व की ओर विमान वाहक युद्धपोत और बमवर्षक भेजे और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन से ट्रम्प की वार्ता को पटरी से उतार दिया।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, ट्रम्प ने हाल ही में कहा था कि अगर मैं बोल्टन की सलाह के मुताबिक़ चलता तो आज अमरीका दुनिया में 4 युद्ध लड़ रहा होता।

सीआईए के पूर्व जासूस का कहना है कि बोल्टन के लिए ट्रम्प का समर्थन दिन प्रतिदिन कम होता जा रहा है। इसलिए उनका जाना अब निश्चित है।

किरियाको का कहना है कि बोल्टन को व्हाइट हाउस से निकाले जाने की प्रक्रिया शूरू हो चुकी है। क्योंकि ट्रम्प अगले राष्ट्रपति चुनाव से ठीक एक साल पहले किसी भी युद्ध में फंसने से बेहतर बोल्टन को बाहर का रास्ता दिखाना उचित समझेंगे।
वाशिंगन पोस्ट ने भी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि ट्रम्प ने नाराज़गी जताते हुए कहा है कि बोल्टन उन्हें युद्ध में फंसाना चाहते हैं।

किरियाको के अनुसार, ईरान के साथ तनाव में वृद्धि को लेकर ट्रम्प और बोल्टन की बातों में काफ़ी हद तक मतभेद पाया जाता है।

उन्होंने कहा, हम यह नहीं कहा जा सकता है कि ट्रम्प ईरान समर्थक हैं, लेकिन निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि बोल्टन ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध चाहते हैं, जबकि ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से यह कह दिया है कि वह ईरान के साथ युद्ध नहीं चाहते हैं।

हाल ही में ट्रम्प ने एलान किया था कि वह बिना किसी पूर्व शर्त के ईरान के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं, हालांकि बोल्टन काफ़ी लम्बे समय से ईरान में सत्ता परिवर्तन और ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध का बात करत रहे हैं।

ट्रम्प के पक्षा को देखकर स्पष्ट है कि ईरान को लेकर उनकी विदेश नीति में कोई बड़ा अंतर नहीं होगा, लेकिन ईरान के साथ सीधे युद्ध से बचने के लिए वह बोल्टन को ज़रूरत बाहर का रास्ता दिखायेंगे, ताकि व्हाइट में ईरान के साथ युद्ध की वकालत करने वाली लॉबी थोड़ी कमज़ोर पड़ जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *