ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प के निराधार दावे

इस परिप्रेक्ष्य में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने परमाणु समझौते से निकलने की घोषणा करके और ईरान के ख़िलाफ़ परमाणु प्रतिबंधों को बहाल करके एक आर्थिक युद्ध शुरू कर दिया है जिसका उद्देश्य ईरानी जनता को आर्थिक समस्याओं में ग्रस्त करके इस देश में अशांति पैदा करना है। इसी तरह ट्रम्प ने क्षेत्रीय स्तर पर भी ईरान के ख़िलाफ़ गतिविधियां तेज़ कर दी हैं और वर्ष 2017 की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के दस्तावेज़ के अंतर्गत अमरीका ने ईरान को नियंत्रित करने के लिए क्षेत्रीय गठबंधन बनाने का काम तेज़ कर दिया है ताकि ईरान को उसकी क्षेत्रीय नीतियों को बदलने पर विवश किया जा सके।

ट्रम्प ने मंगलवार को अमरीकी कांग्रेस में अपने वार्षिक भाषण में एक बार फिर ईरान के ख़िलाफ़ अपने घिसे-पिटे दावों को दोहराया। उन्होंने ईरान को आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक कहा लेकिन एेसा लगता है कि वे यह बात भूल गए हैं कि पिछले राष्ट्रपति चुनाव में वे स्वयं ही कह चुके हैं कि ओबामा सरकार ने आतंकी गुट दाइश को अस्तित्व प्रदान किया था।

ट्रम्प के दावों के बावजूद, जिन्होंने ईरान को दबाव में और अलग-थलग दर्शाने की कोशिश है, इस समय दुनिया, ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प सरकार की शत्रुतापूर्ण नीतियों से अच्छी तरह अवगत हो चुकी है। ट्रम्प सरकार के इस रवैये का कारण, क्षेत्र में अमरीका की विस्तारवादी व हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों के मुक़ाबले में इस्लामी गणतंत्र ईरान का डटा रहना है। ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका की शत्रुतापूर्ण नीतियां, ईरानी जनता की अधिक एकजुटता और उसके भीतर साम्राज्यवाद विरोध की भावना के मज़बूत होने का ही कारण बनी हैं।

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