पोप फ़्रांसिस के बयान से बढ़ा विवाद, धर्मगुरुओं और पादरियों ने ननौ से किया बलात्कार, चर्च के काले करतूतों पर एक नज़र

एएफ़पी के अनुसार पोप फ़्रांसिस की इस स्वीकारोक्ति से एक फिर विवाद ने जन्म ले लिया है।

संयुक्त अरब इमारात का ऐतिहासिक दौरा करने के बाद वेटीकन सिटी वापस लौटते हुए हवाई जहाज़ में पत्रकार के एक सवाल के जवाब में पोप फ़्रांसिस का कनहा था कि ननों के बलात्कार में कुछ पादरी और धर्मगुरु भी लिप्त हैं।

पोप फ़्रांसिस का बयान ऐसे समय में सामने आया जब एक सप्ताह पहले वेटीकन की महिलाओं से संबंधित एक पत्रिका ने महिलाओं के साथ होने वाले बलात्कार के बारे में रहस्योद्धाटन किया था और बताया था कि धर्मगुरु, पीड़ित ननों से गर्भपात की मांग करते हैं या फिर पैदा होने वाले बच्चों को स्वीकार करने से इन्कार कर देते हैं।

उन्होंने यह भी संभावना व्यक्त की कि यह घटना अब भी जारी है।  उनका कहना था कि चर्च इस मामले पर कई पादरियों को ससपेंड कर चुका है और वेटीकन इस पर लंबे समय से काम कर रहा है।

ज्ञात रहे कि पिछले वर्ष मई में रोमन कैथोलिक चर्च के वित्तीय मामलों के प्रमुख और पोप फ़्रांसिस के वरिष्ठ सहयोग कार्डनल जार्ज बेल पर “ऐतिहासिक” यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।

पिछले वर्ष नवम्बर में कैथोलिक चर्च की ननों की अंतर्राष्ट्रीय संस्था ने मांग की थी कि पादरियों के हाथों यौन उत्पीड़न का शिकार बनने वाली समस्त ननें, “भय और चुप्पी का दायरा” तोड़कर अपनी आवाज़ उठाएं।  उन्होंने बल दिया कि अपने साथ होने वाली यौन उत्पीड़न की पुलिस में रिपोर्ट करें।

पिछले वर्ष ही अगस्त में न्यूयार्क की नयी ज्यूरी की रिपोर्ट में बताया गया था कि पेन्सेलवेनिया में 6 कैथोलिक प्रशासन से प्राप्त दस्तावेज़ों से स्पष्ट होता है कि लगभग 300 पदारियों ने एक हज़ार से अधिक बच्चों का रेप किया।

इससे दो महीना पहले जून में पोप फ़्रांसिस ने बच्चों के साथ रेप के स्कैंडल में लिप्त चिली के तीन पादारियों के त्यागपत्र स्वीकार किए थे।

जुलाई के महीने में आस्ट्रेलिया की अदालत ने कैथोलिक आर्ज पिश्प फ़िलिप विल्सन को 70 के दशक में बच्चों के रेप की घटनाओं पर चुप्प रहने के जुर्म में 12 महीने की नज़रबंदी की सज़ा सुना दी थी।

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