राज्यसभा में चैथे दिन भी कार्यवाही बाधित

नई दिल्ली, 07 फरवरी (वेबवार्ता)। राज्यसभा में विभिन्न मुद्दों को लेकर बना गतिरोध लगातार चैथे दिन भी जारी रहा और बृहस्पतिवार को उच्च शिक्षण संस्थाओं में नियुक्तियों में आरक्षण में रोस्टर प्रणाली को लेकर विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। हंगामे के कारण उच्च सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजकर करीब पांच मिनट पर दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। आरक्षण में रोस्टर प्रणाली का विरोध कर रहे सदस्यों ने सरकार से तत्काल विधेयक लाने की मांग की। वहीं सरकार ने आरक्षण व्यवस्था के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पुनरीक्षण याचिका दाखिल की जाएगी। सुबह 11 बजे बैठक शुरु होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि पिछले तीन दिनों से विभिन्न मुद्दों पर सदन की बैठक लगातार बाधित है। बजट सत्र में कामकाज के लिये सिर्फ चार दिन बचे हैं। एक दिन (शुक्रवार) गैर सरकारी कामकाज के लिये निर्धारित है। उन्होंने आज राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा कराने और शुक्रवार को गैर-सरकारी कामकाज की बजाय विभिन्न दलों की ओर से उठाये गये मुद्दों पर चर्चा कराने का सुझाव दिया। इस सुझाव पर विभिन्न दलों के नेताओं के साथ विचार विमर्श के लिये उन्होंने 11 बज कर करीब 10 मिनट पर बैठक को दस मिनट के लिये स्थगित कर दिया। एक बार के स्थगन के बाद 11 बज कर करीब 20 मिनट पर बैठक फिर शुरू होने पर सभापति नायडू ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सहमति बन गई है। लेकिन यह चर्चा शुरू करने से पहले, उस अहम मुद्दे पर सदस्य अपनी बात संक्षेप में रखें जिसे सदन में लगातार उठाया जा रहा है। नायडू द्वारा दी गई व्यवस्था के बाद शून्यकाल में नियुक्तियों में आरक्षण में रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर संक्षिप्त चर्चा हुयी और सदस्यों ने आरक्षण संबंधी रोस्टर प्रणाली के मुद्दे पर सरकार से तत्काल विधेयक लाने की मांग की। चर्चा के जवाब में मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आरक्षण व्यवस्था के लिए सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर पुनरीक्षण याचिका दाखिल करेगी और उसे उच्चतम न्यायालय से न्याय मिलने की पूरी उम्मीद है। मंत्री के जवाब पर विपक्षी सदस्यों ने गहरी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस संबंध में तत्काल विधेयक लाया जाना चाहिए। सपा और बसपा के सदस्य आसन के समक्ष आ कर सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। सभापति नायडू ने सदस्यों से शांत रहने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। लेकिन हंगामा थमते न देख उन्होंने 11 बज कर करीब 35 मिनट पर बैठक दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी। संसद के मौजूदा बजट सत्र के दौरान उच्च सदन में लगातार गतिरोध कायम है और अब तक एक दिन भी प्रश्नकाल एवं शून्यकाल सुचारू रूप से नहीं चल सके हैं। दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति नायडू ने भाजपा के भूपेन्द्र यादव से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के लिये पेश किए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलने को कहा। इसी बीच, सपा के जावेद अली और बसपा के अशोक सिद्धार्थ ने नियम 267 के तहत दिए गए अपने नोटिस पर चर्चा की मांग की। उन्होंने आरक्षण से जुड़ी रोस्टर प्रणाली पर चर्चा के लिए नोटिस दिया था। नायडू ने उन्हें अनुमति देने से इंकार करते हुये कहा कि इस मुद्दे पर सपा, बसपा और अन्य दलों के सदस्य अपना पक्ष रख चुके हैं और मंत्री ने इसका जवाब भी दे दिया है। नायडू द्वारा अनुमति नहीं मिलने के बाद भी अली और सिद्धार्थ ने अपनी बात रखने का प्रयास किया तथा सदन में हंगामा शुरू हो गया। सभापति ने सदस्यों से शांत रहने और राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करने की अपील की। उन्होंने कहा सदन की कार्यवाही का अधिकांश समय पहले ही नष्ट हो चुका है। सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर अपना पक्ष रखा और मंत्री ने उसका जवाब भी दिया। इसी दौरान सपा, बसपा, राजद, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने आसन के समीप आकर नारेबाजी शुरु कर दी। नायडू ने कहा आप लोकतंत्र का अपमान कर रहे है उसकी अवमानना कर रहे हैं। हंगामा थमते न देख उन्होंने बैठक को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया।

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