प्रतिरोध की शक्ति दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैः सैयद हसन नसरुल्लाह

लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने कहा है कि प्रतिरोध की शक्ति दिन- प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और यह हमारे शहीद कमांडरों की मीरास है और यह रास्ता जारी रहेगा। सैयद हसन नसरुल्लाह ने बल देकर कहा कि यह प्रतिरोध है जो समीकरण को निर्धारित करेगा और सफलता के चरणों को तय करेगा।

उन्होंने बल देकर कहा कि प्रतिरोध की शक्ति केवल हथियार नहीं है बल्कि आस्था और जनसंकल्प है।

उन्होंने ईरान की इस्लामी क्रांति की चालीसवीं वर्षगांठ की ओर संकेत करते हुए कहा कि ईरान उससे भी अधिक शक्तिशाली है कि कोई युद्ध छेड़कर उसे लक्ष्य बनाये और ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता की चालीसवीं वर्षगांठ के अवसर पर निकाली जाने वाली रैलियों में जनता की भव्य उपस्थिति प्रतिबंधों एवं धमकियों के प्रति ईरान का करारा जवाब था।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि वार्सा कांफ्रेन्स का लक्ष्य अरब देशों के साथ इस्राईल के गुप्त संबंधों को सार्वजनिक करना व सामान्य बनाना और ईरान का परिवेष्टन तथा प्रतिरोध को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिका, इस्राईल और उनके क्षेत्रीय घटकों के षडयंत्रों से मुकाबले का एक मात्र मार्ग प्रतिरोध है।

यद्यपि घोषणा यह की गयी थी कि वार्सा बैठक का मुख्य विषय मध्यपूर्व की शांति व सुरक्षा के बारे में वार्ता करना है परंतु अमेरिका ने इस बैठक में ईरान विरोधी अपना पुराना राग अलापा। इसके बावजूद कुछ देशों ने अमेरिका की हां में हां नहीं मिलाया और वार्सा बैठक की समाप्ति पर जारी होने वाली विज्ञप्ति में किसी विशेष देश की ओर भी संकेत नहीं किया गया।

बहरहाल ईरान से दुश्मनी का एक बड़ा कारण यह है कि वह साम्राज्यवादियों के अवैध हितों के मार्ग की सबसे बड़ी रुकावट है और वह दूसरे राष्ट्रों के लिए आदर्श बनता जा रहा है।

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