दुश्मन कोई मूर्खता नहीं कर सकताः वरिष्ठ नेता + फ़ोटो

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने पूर्वी आज़रबाइजान की जनता के एक बड़े समूह से मुलाक़ात में दुश्मनों की कमज़ोर स्थिति अर्थात साम्राज्यवादियों और उनमें सर्वोपरि अमरीका की कम़जोर स्थिति की ओर संकेत किया।

उन्होंने बल दिया कि हम स्वयं को भोला दिखाना नहीं चाहते और दुश्मनों से निश्चेत हो जाएं किन्तु वास्तविकता इस बात की सूचक है कि दुश्मन बुरी तरह से आंतरिक और बाहरी मामलों में उलझा हुआ है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने सामाजिक समस्याओं, युवाओं के अवसाद और उनकी निराशा, अपराध और हत्या के आंकड़ों में वृद्धि, मादक पदार्थों और नशे की लत में वृद्धि, अमरीकी अधिकारियों में आपसी टकराव और आश्चर्यजनक ऋणों को अमरीका की कुछ समस्याएं क़रार दिया और कहा कि यह सभी मामले पुष्ट हैं और यह आंकड़े अमरीका की आधिकारिक और आंतरिक रिपोर्टों से लिए गये हैं और इन्हीं समस्याओं और परेशानियों के कारण, इराक़, सीरिया और अफ़ग़ानिस्तान में उनकी यह हालत है और वह बुरी तरह बौखलाए हुए हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने वार्सा की विफल बैठक के आयोजन की ओर संकेत किया और कहा कि अमरीका के बुद्धिहीन अधिकारियों ने अपनी सहयोगी, कमज़ोर और धौंस में आने वाली कुछ सरकारों को वार्सा बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया ताकि ईरान के विरुद्ध कोई फ़ैसला किया जा सके किन्तु यह बैठक किसी भी परिणाम तक नहीं पहुंची और यह सब कमज़ोरी की निशानी है और दुश्मन जो कि कमज़ोरी की हालत में बौखलाया हुआ है, इसीलिए वह हंगामे मचा रहा है और उट पटांग बक रहा है।

वरिष्ठ नेता ने वार्सा बैठक की विफलता और विदित रूप से मुस्लिम देशों के अधिकारियों की ज़ायोनी शासन के साथ बैठक और उनके द्वारा अमरीका के साथ देने को उनकी बेइज़्ज़ती का कारण क़रार दिया और बल दिया कि इन लोगों की अपने राष्ट्र के निकट भी कोई इज़्ज़त व सम्मान नहीं है।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता ने देश के अधिकारियों को सलाह देते हुए पश्चिम की कार्यवाहियों और बर्ताव को वास्तव में धोखाधड़ी का सही अर्थ क़रार दिया और कहा कि अमरीका का तो पता चल गया वह खुल्लम खुल्ला सामने आ गया है किन्तु यूरोप से होशियार रहने की आवश्यकता है क्योंकि वे धोखाधड़ी से काम ले रहे हैं।

इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई ने  कहा कि उस दिन जब यह क्रांति एक कमज़ोर पौधा थी, उस समय सभी दुश्मन एकजुट थे किन्तु वह कुछ बिगाड़ नहीं सके और अब जबकि यह पौधा एक मज़बूत वृक्ष बन चुका है वे कोई भी मूर्खता नहीं कर सकते।

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