सऊदी क्राउन प्रिंस की भारत यात्रा उनकी पाकिस्तान यात्रा से क्यों अलग है?

नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान, मोहम्मद बिन सलमान भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाक़ात करेंगे।

बुधवार को मोदी के साथ मुलाक़ात में बिन सलमान व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा और आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे।

दोनों नेता भारतीय रिफ़ायनरियों में सऊदी अरब की तेल की सबसे बड़ी कंपनी अरामको के निवेश समेत कंपनी की हमाराष्ट्रा में दुनिया की सबसे बड़ी रिफ़ायनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजना पर बातचीत करेंगे।

सऊदी अरब और भारत की इस संयुक्त परियोजना पर 44 अरब डॉलर की लागत आने का अनुमान है।

ज़मीनों के अधिकरण के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शनों के बाद सोमवार को महाराष्ट्रा के मुख्यमंत्री देवेन्द्रा फ़डनवीस ने भारत-सऊदी अरब की इस संयुक्त परियोजना का स्थान बदलने का एलान किया था।

पिछले दो दशकों के दौरान भारत और सऊदी अरब के संबंधों में काफ़ी हद तक विस्तार हुआ है। सऊदी अरब में 27 लाख से अधिक भारतीय काम करते हैं, सऊदी अरब भारत का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है और दोनों के बीच 28 अरब डॉलर का परस्पर व्यापार होता है।

भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरत का 20 प्रतिशत कच्चा तेल सऊदी अरब से आयात करता है।

भारतीय व्यवसायी, मैनेजर और पेशेवर लोग पहले से ही सऊदी अरब में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

सऊदी अरब के भारत के नम्बर एक सशस्त्र प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से बहुत ही निकट संबंध हैं और उसने परमाणु हथियारों के निर्माण में पाकिस्तान की वित्तीय सहायता की है।

दोनों पड़ोसी देशों के बीच पिछले हफ़्ते तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया, जब भारत प्रशासित कश्मीर में एक आत्मघाती हमले में भारत के 42 अर्धसैनिकों की मौत हो गई।

रविवार को प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान, दोनों देशों के बीच 20 अरब डॉलर के निवेश समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे।

पिछले साल अक्तूबर में तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी कांसुलेट में पत्रकार जमाल ख़ुशुक़जी की हत्या में लिप्त होने के आरोपों के बाद से सऊदी क्राउन प्रिंस को राजनीतिक संकट का सामना है।

एशियाई देशों की यात्रा को क्राउन प्रिंस के इस संकट से निकलने के एक प्रयास के तौर पर भी देखा जा रहा है।

मोहम्मद बिन सलमान की भारत यात्रा से ठीक पहले सोमवार को हज़ारों लोगों ने यमन के आम लोगों के जनसंहार और ख़ाशुक़जी की हत्या के ख़िलाफ़ विशाल प्रदर्शन किए।

आल इंडिया तनज़ीमे उलमाए इस्लाम के प्रवक्ता और प्रदर्शनों के एक आयोजकर्ता शुजात अली क़ादरी का कहना था, सऊदी अरब., यमन में युद्ध अपराधों का अपराधी है। मोहम्मद बिन सलमान के युद्ध अपराधों की वजह से इस देश में बड़ी संख्या में बच्चे और आम नागरिक मारे जा रहे हैं। इसलिए भारत सरकार को सऊदी युवराज का स्वागत नहीं करना चाहिए।

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